दो साल बाद भी एक माँ बार बार पूछ रही है कंहा है मेरा नज़ीब

जेएनयू दिल्ली के छात्र नजीब अहमद को यूनिवर्सिटी से ग़ायब हुए दो साल हो चुके हैं। मामला सीबीआई के पास है लेकिन फिर भी अबतक नज़ीब का कोई सुराग नहीं लग पाया है। “यूनाइटेड अगेंस्ट हेट” के सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खान इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष कर रहें हैं। नदीम खान नज़ीब की माँ के साथ मिलकर सीबीआई, पुलिस और सरकार पर लगातार दबाव बना रहे है कि नज़ीब को ढूंढ कर लाओ और इसमें जिन लोगों का भी हाथ है उनको गिरफ्तार किया जाए।

शुक्रवार को भी दिल्ली में सीबीआई हेडक्वॉर्टर के सामने एक प्रोटेस्ट रखा गया था। प्रोटेस्ट से पहले नदीम खान अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि

“आधे दिन की छुट्टी लीजिये ,आफिस और कॉलेज से वक़्त निकालिए और नजीब की माँ की आवाज़ को बुलंद करने पहुँचिये,
अगर वक़्त नही निकाल सकते अपने शेड्यूल में आगे पीछे नही कर सकते तो फिर खामोश रहिये काम का हवाला मत दीजियेगा, इमरजेंसी में भी आप सब अपने काम से छुट्टी लेते हैैं, और जो लोग आएंगे वो भी खाली नही बैठे होंगे।
हाँ, अगर आपको लगता कि आफिस में मूड बदलने या टाइम पास के लिए सोशल मीडिया में लिख देने से कोई बदलाव आ जायेगा तो ये महज़ खाम खयाली है। कोई साहब कह रहे है फलां जेल में है,  फलां निकल आया, फला के लिए स्क्रीन काली हुई थी, फला के लिए लोग कोर्ट पहुच गए, फ़ला के लिए नही पहुचे,
लेकिन साहब हम भी तो कंही पहुचे, हम सब की आदत बन गयी है पहले हम दूसरों का विरोध करते है, फिर जब बात अपने पर आती है अशराफ और अर्ज़ाल में ले जाएंगे। फिर कुछ नही समझ आएगा तो सदाबहार काम मसलक को ले आएंगे।

इसी शहर में जिसमे लाखो की तादाद में अपने लोग है वहा एक माँ जो दो साल से अपने बेटे को ढूंढ रही है वहाँ सिर्फ चंद शक्लें ही दिखाई देती है।
इसलिए भाई साहब हाथ जोड़कर गुज़ारिश है कि ज्ञान नही वक़्त चाहिए।
CBI हेडक्वार्टर आज 3 बजे लोधी रॉड
#whereisNajeeb

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