जानिए क्या है शक्ति एंटी सेटेलाइट अभियान जिसका ज़िक्र आज प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में किया!


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह देश को एक जरूरी संदेश देने के लिए 11.45 बजे पूरी आवाम को सोशल मीडिया के जरिए आमंत्रण दिया। आमंत्रण आने के बाद से ही जनता में कुलबुलाहट होने लगी कि क्या होने वाला है? आखिरकार पीएम तय समय से थोड़ा लेट आए और बोले “भारत ने आज एक बड़ी कामयाबी पाई है”।


अब किसी की भी उत्सुकता रोके नहीं रूक रही थी तो पीएम मोदी ने आगे बताया कि ‘आज भारत ने खुद का नाम एक स्पेस पावर’ के रूप में लिखवा लिया है।

इससे पहले रूस, अमेरिका और चीन इन देशों के पास ही यह तमगा था जिनके बाद भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है। अब आप कामयाबी, सिद्धि वाली शब्दावली में ज्यादा देर तक उलझें उससे पहले हम आपको बता देते हैं हुआ क्या है ?

दरअसल डीआरडीओ यानि Defence Research And Development Organisation और इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किमी दूर LEO (Low Earth Orbit) में एक लाइव जासूसी सैटेलाइट को उड़ा दिया है।

 

यह लाइव सैटेलाइट डीआरडीओ के एंटी सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) के निशाने पर था। इस कामयाब निशाने के बाद भारत उन देशों में शुमार हो गया है जो खुद को स्पेस पावर बताते हैं।
मिशन शक्ति क्या है ?

इसरो और डीआरडीओ के वैज्ञानिक मिशन शक्ति पर काफी समय से काम कर रहे हैं। इस मिशन के जरिए ए सैट (ऐंटि सैटलाइट) मिसाइल से अंतरिक्ष में जासूसी सैटेलाइट पर निशाना लगाया गया। जिस जासूसी सैटेलाइट पर निशाना लगा है वो 300 किलोमीटर दूर लो अर्थ ऑर्बिट में थी। इस काम को करने में महज 3 मिनट का समय लगा।

यह माना जा रहा है कि युद्ध के समय में भारत का इस तरह से तकनीकी तौर पर मजबूत होना एशिया के अन्य देशों को एक कड़ा संदेश है।
ये Low Earth Orbit क्या होता है ?

पृथ्वी की सतह से 1200 मील यानी लगभग 2 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जो ऑर्बिट यानि कक्षा होती है उसे लो अर्थ ऑर्बिट कहा जाता है। इस ऑर्बिट में जो सैटेलाइट होते हैं वो टेलीकम्युनिकेशन और डेटा कम्युनिकेशन के काम आते हैं। इन सैटेलाइट की स्पीड भी काफी तेज बताई जाती है।

बताया जा रहा है कि इस ऑर्बिट में तेज स्पीड से सैटेलाइट का चलना भारतीय मिसाइल के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी साबित हुआ।

इसलिए लाइव सैटेलाइट को मार गिराना काफी मुश्किल होता है क्योंकि लाइव सैटेलाइट का पता करने के लिए काफी केल्कुलेशन करने की जरूरत होती है।

लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट के बारे में कुछ और बातें-

– अंतरिक्ष में मानव निर्मित अधिकांश वस्तुएँ LEO में ही है।

– ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और पेजिंग जैसे डेटा संचार वाले सैटेलाइट इसी ऑर्बिट में है।

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