पितृसत्ता से लेकर साम्प्रदायिकता को चुनौती देती फ़िल्म गुलाबो सिताबो

शूजीत सरकार (Shoojit sircar) की फ़िल्म गुलाबो-सिताबो अपनी सहज गति में भारतीय समाज पर कुछ गहरे…

कैफ़ी आज़मी चाहते थे इतिहास का पुनर्लेखन ऐसा हो जिसमें मोहब्बतों का इतिहास लिखा जाए नफ़रतों का नहीं !

कैफ़ी आज़मी:यादों के झरोखें से —————————————- “बस इक झिझक है यही हाल ए दिल सुनाने में,…

एक क़रीबी दोस्त ने बताया, गांधी को लेकर क्या सोच रखते थे इरफान खान !

कुछ पल इरफान के साथ, बनारस से मुम्बई तक दिसम्बर 2014 की एक सुबह एक अनजाने…

सिनेमाई समझ के सबसे बड़े “हासिल”, आप हमेशा “मक़बूल” रहोगे !

ये मेरे अंदर की जो खलिश है वो शायद ही शब्दों में बयान हो पाये। ये…