दक्षिणी राजस्थान में उभरती “भारतीय ट्राइबल्स पार्टी”आदिवासियों को राजनैतिक रूप से सक्षम बना पाऐगी!


सुनिता घोगरा आदिवासी बहुल डूंगरपुर की एकमात्र पीएचडी,चुनावी यात्रा के दौरान सुनीता जी के साथ वहां की राजनीति से लेकर समाज,संस्कृति,परम्पराओं के साथ “जल जंगल और ज़मीन” के नारे के सही माने पर विस्तृत चर्चा रही।

डूंगरपुर और विशेषकर आदिवासी समाज को लेकर राजस्थान का एक दूसरा हिस्सा क्या सोचता है इसपर वहां का युवा काफी ढंग से बात करना चाहता है,ऐसा ही कुछ सुनीता जी की बातों से में भी महसूस हुआ!

वो कहती हैं की “हमारे पहनावे से लेकर रहन सहन बातचीत के ढंग और व्यवहार को लेकर जो आप लोग सोचते हो हम उसके बिल्कुल विपरीत हैं,बाहरी लोगों को यहां आने में डर महसूस होता है!

यहां के लोग अशिक्षित और फूहड़ महसूस होते हैं लेकिन हम उनकी सोच के बिल्कुल इतर हैं,हम अच्छे से जानते हैं की सम्मान का सही मतलब क्या होता है,हमारे लोग अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

यहां महिला सुरक्षा,स्वतंत्रता,सम्मान देश के दूसरे हिस्सों,धर्मों से बहुत ठीक है ये बताते हुए सुनीता खुद अपना उदहारण देकर बताती हैं की मैं अपने किसी भी फैसले लेने के लिए सक्षम भी हूँ और आज़ाद भी,हमारे यहां लड़कियों को घर से बाहर निकलने की बंदिशें और बाहर के माहौल का वो डर नही है जो हम देश के अनेक सोकाल्ड प्रोग्रेसिव हिस्सों में देखते हैं।

सुनीता वहां की राजनीति पर बात करते हुए साफ शब्दों में भाजपा-कांग्रेस को दरकिनार करते हुए बिटीपी को आदिवासियों का एकमात्र विकल्प बताती हैं,भारतीय ट्राइबल पार्टी दक्षिण राजस्थान की राजनीति में एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभरती हुई पार्टी है!

जिसे यहां के लोग उनकी अपनी पार्टी के रूप में देखते हैं,वो बताती हैं की बीते विधानसभा चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस के प्रत्याशियों को पछाड़ते हुए दो सीटें जीतने वाली ‘भारतीय ट्राइबल पार्टी’ आज यहां के बच्चे के मुंह पर है!

हमने बहुत वक़्त तक भाजपा कांग्रेस को मौका दिया है लेकिन हमारी समस्याओं के समाधान पर इन पार्टियों ने ध्यान केंद्रित नही किया इसीलिए हमारे लोगों में एक विकल्प तैयार करने की उत्सुकता जागी जिसके परिणाम आपके सामने हैं,हम चाहते हैं की हमारे अपने लोग संसद में जाकर हमारी आवाज़ को उठा सकें।

“चुनावी यात्रा के दौरान हमने इस लोकसभा क्षेत्र की हर एक चुनावी चर्चा में बिटीपी को लेकर किसी भी तरह की नकारात्मक प्रतिक्रिया नही सुनी,यहां तक की एक शख्श जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट करने का मानस बनाया है वो भी बिटीपी की तारीफ करते हुए इसके प्रभाव को लेकर हामी भरता है”

ये बात सही है की बिटीपी इस क्षेत्र में सीधेतौर पर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रही है लेकिन यहां भाजपा के आने का भय नही है इसलिए बिटीपी का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।

 

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