चिकित्सा मंत्री ने किया अंतरा इन्जेक्टबल कॉन्ट्रासेप्टिव ई ट्रैनिंग मॉड्यूल का शुभारंभ


जयपुर: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने गुरुवार को कोरोना काल में परिवार कल्याण के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निरन्तरता बनाए रखने के लिए विशेष रूप से तैयार अंतरा इन्जेक्टबल कॉन्ट्रासेप्टिव ई-ट्रेनिंग मॉड्यूल का शुभारंभ किया.

चिकित्सा मंत्री ने सीफू (स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ एंड फैमिली वेलफेयर) में आयोजित एक राज्य स्तरीय वर्चुअल कार्यक्रम में माड्यूल का शुभारंभ करते हुए कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों मे दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम देने के लिए अंतरा इन्जेक्टबल ई-ट्रेनिंग मॉड्यूल विकसित किया है. उन्होंने बताया कि इस मोड्यूल के जरिए फील्ड में बैठे सेवा प्रदात्ता को आसानी से प्रशिक्षण दिया जा सकेगा.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत गर्भ निरोधक साधनों में अंतरा इन्जेक्टेबल कॉन्ट्रासेप्टिव को वर्ष 2016 में शामिल किया गया है. राजस्थान में जुलाई, 2017 से परिवार कल्याण साधनों में नए गर्भनिरोधक अंतरा इन्जेक्टेबल कॉन्ट्रासेप्टिव की सेवाएं प्रारम्भ की गई. अब ये सेवाएं सेवा प्रदाताओं (चिकित्सकों एवं नर्सिंगर्मियों) को प्रशिक्षण उपरान्त उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक प्रदान की जा रही है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 3.35 लाख महिलाओं ने अंतरा को गर्भ निरोधक के रूप में अपनाया है.

समय की जरूरत हैं ऐसे प्रयोग

डॉ शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान के माध्यम से वर्ष 2017 से 2021 तक 229 सेवा प्रदाताओं (चिकित्सकों एवं नर्सिंगर्मियों) को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है.

इनके द्वारा 3 हजार से अधिक चिकित्सकों एवं 9 हजार 300 स्टॉफ नर्स एवं एएनएम को अंतरा इन्जेक्टेबल कॉन्ट्रासेप्टिव में क्लास रूम प्रशिक्षण प्रदान कर प्रशिक्षित किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि देश में पहली बार सीफू और आई पी ई ग्लोबल द्वारा कोविड-19 महामारी को देखते हुए प्रशिक्षण को सुचारू एवं प्रभावी बनाने हेतु अंतरा इन्जेक्टबल ई-ट्रेनिंग मॉड्यूल विकसित किया है. उन्होंने कहा कि ऐसे अभिनव प्रयोग आज के समय की जरूरत भी है.

प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ली जा रही है तकनीकी मदद

चिकित्सा सचिव सिद्वार्थ महाजन ने बताया कि कोरोना काल में भी विभाग ने तकनीकी मदद से हर काम का आसान करने का प्रयास किया है. अस्पतालों में बैड्स की मॉनिटरिंग हो या ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर्स की उपलब्धता सभी में डीओआईटी से तकनीकी मदद ली जा रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पंरपरागत प्रशिक्षण के बजट को ई मॉड्यूल जैसे मॉडल की तरह अपनाकर प्रशिक्षण व्यवस्था को और भी सहज बनाया जाएगा.

डिस्टेंस मोड पर दिया जाएगा प्रशिक्षण

सीफू के निदेशक डॉ ओपी डोरिया ने कहा कि ई मॉड्यूल से दूर-दराज के गांवों के स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा. इस ई-मोड्यूल में 16 विडियो (जिसमें 15 ट्रेनिंग मॉड्यूल व 2 अंतराराज एप और वेब पोर्टल के बारे में बताया गया है) बनाए गए है. ये डिस्टेंस मोड (ऑनलाइन प्रशिक्षण या वीसी) से आयोजित हो सकेंगे.

रहेगी एकरूपता और निरंतरता

निदेशक आरसीएच डॉ लक्ष्मण सिंह ओला ने कहा कि इस मॉड्यूल का उद्देश्य परिवार कल्याण से संबंधित सभी प्रशिक्षणों की राज्य में एक रूपता व एक समान गुणवत्ता बनाए रखने एवं ऑनलाइन प्रशिक्षणों को अधिक प्रभावी बनाना है. उन्होंने बताया कि मॉड्यूल को तैयार करने के लिए विषय विशेषज्ञ, प्रशिक्षक, लाभार्थी, चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ से फीडबैक लिए गए हैं. इसमें परियोजना निदेशक-परिवार कल्याण, राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान के फैकल्टीज व आईपीई ग्लोबल टीम का सतत् जुडाव और सम्पूर्ण सहयोग रहा है.

कार्यक्रम में अतिरिक्त मिशन निदेशक मेघराज सिंह रत्नू सहित आईपीई ग्लोबल से प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशीष मुखर्जी, डिप्टी डायरेक्टर श्रीनिवासन कलाम, टीम लीडर सचिन कोठारी, स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. इरफ़ान सैय्यद, कौशल किशोर, प्रियंका व डॉ. जयदेव खत्री स्टेट टेक्निकल ऑफिसर झपाआईंजगो और चिकित्सा विभाग के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे जबकि वर्चुअली माध्यम से प्रदेश भर के चिकित्सा संस्थानों सें संबंधित अधिकारी व कार्मिक जुड़े रहे.


 

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