Rajsthan Chief Minister Ashok Gehlot and Sachin Pilot during the release of the party's manifesto for upcoming Lok Sabha polls 2019 in new delhi on tuesday.Express photo by Anil Sharma.02.04.2019

राजनीति

राजस्थान: गहलोत-पायलट के अंदरूनी झगड़े से कांग्रेस को उपचुनावों में नुकसान होगा !

By admin

February 23, 2021

राजस्थान के चार विधानसभा उपचुनावों की तारीखों का ऐलान अभी तक नही हुवा पर इसके बावजूद कांग्रेस, भाजपा के अलावा जनता सेना और कुछ निर्दलीय सम्भावित उम्मीदवारों ने टिकट पाने व चुनाव लड़ने के लिये राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष मे बैठाने शुरू कर दिये है।

दुसरी तरफ कांग्रेस में गहलोत व पायलट के मध्य जारी वर्चस्व की जंग से कांग्रेस उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है। वही भाजपा उम्मीदवारो की स्थिति का ठीक ठीक आंकलन वंसुधरा राजे समर्थक मतदाताओं की भूमिका पर निर्भर करेगा।

वसुन्धरा राजे समर्थको की पूर्व में मण्डावा व खीवसर विधानसभा उपचुनाव मे रही भूमिका की तरह जल्द होने वाले चार विधानसभाओं के उपचुनाव मे भी वही भूमिका रहती है तो कांग्रेस को लाभ होगा। जबकि आम धारणा बनने लगी है कि सचिन पायलट से हमदर्दी रखने वाले मतदाता गहलोत की उक्त चुनाव मे खाट खड़ी करने की कोशिश कर सकते है।

अशोक गहलोत सरकार गठित होने के बाद पहले दो उपचुनाव हुये उनमे से मंडावा सीट कांग्रेस ने भाजपा से झटकी व खींवसर सीट रालोपा की थी ओर रालोपा के पास ही रही।

लेकिन अब होने वाले चार विधानसभा सीटों के उपचुनाव में से तीन सीट सुजानगढ़, बल्लबनगर व सहाड़ा कांग्रेस के पास थी ओर एक सीट राजसमंद भाजपा के पास थी। वर्तमान समय मे बल्लबनगर पर जनता सेना मजबूत नजर आ रही है। वही राजसमंद व सहाड़ा पर भाजपा भारी नजर आ रही है। सुजानगढ़ सीट पर कड़ा मुकाबला है।

खास बात यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस को  परम्परागत मतो के अलावा गुर्जर मत अच्छी तादाद मे मिले थे। जो आज के हालात मे सचिन पायलट के बगैर आना मुश्किल लगता है। वही जाट व मुस्लिम जैसे परम्परागत मतो मे भी बडी छीजत होना देखी जा रही है। मुस्लिम युवाओं का बडा तबका असदुद्दीन आवेसी का दीवाना होने के साथ साथ मुख्यमंत्री गहलोत को उक्त उपचुनावो के बहाने सबक सीखाना चाहता है।

डूंगरपुर जिलाप्रमुख चुनाव मे बीटीपी को रोकने के लिये कांग्रेस द्वारा भाजपा से हाथ मिलाने से नाराज बीटीपी मतदाता भील (आदीवासी) बल्लबनगर मे कांग्रेस से डूंगरपुर का बदला लेने पर उतारु है जबकि सहाड़ा, बल्लबनगर व राजसमंद का मुस्लिम मतदाता उदासीन नजर आ रहा है। वहा मुस्लिम मतदाता मतदान करने उदासीनता के चलते कम तादाद मे घर से निकलता वर्तमान हालात मे नजर आ रहा है। सुजानगढ़ मे मुस्लिम मतदाता है तो अच्छी तादाद मे लेकिन उनकी उदासीनता को खत्म करके उनको मतदान के प्रति सक्रिय नही किया तो वहां के परिणाम भी कांग्रेस के लिये उलट आ सकते है।

चारो उपचुनाव मे कांग्रेस की मजबूत स्थिति नही होने के विपरीत भाजपा के भी अंदरूनी झगड़े उसके लिये घातक साबित हो सकते है। फर्क इतना है कि संघ वर्कर भाजपा के लिये इमानदारी से काम करेगा वही कांग्रेस के पास केडर की बडी कमी है। जिसके चलते उसके परम्परागत मतो मे छीजत होता नजर आ रहा है। हां वसुंधरा राजे की जब भाजपा उम्मीदवार तय करने मे नही चली तो उनके समर्थकों का झुकाव कांग्रेस के हित मे होगा।

मदरसा पैरा टीचर्स, उर्दू टीचर्स, यूनानी चिकित्सकों की भर्ती व अन्य समस्याओं को लेकर लगातार हो रहे आंदोलन, वक्फ जायदादो का खुर्द बूर्द होने के साथ साथ बोर्ड की उदासीनता, मुस्लिम समुदाय के सम्बंधित बोर्ड-निगमो का गठन नही होना, मुस्लिम अधिकारियों को फिल्ड पोस्टींग से दूर रखने सहित अनेक मुद्दों को लेकर सरकार व समुदाय के मध्य अविश्वास गहरा जाना सरकार व कांग्रेस पार्टी के अलावा मुख्यमंत्री की छवि के लिये कतई ठीक नही कहा जा सकता है।

इस अविश्वास को खत्म करने के लिये सही सही बात समय समय पर मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मुस्लिम विधायक, बोर्ड अध्यक्ष व अन्य नेताओं की बनती है जिनमे वो अबतक पुरी तरह असफल रहे है। जबकि इसके विपरीत अधीकांश मुस्लिम विधायक समुदाय के मध्य आकर कहते है कि सरकार व मुख्यमंत्री स्तर पर हमारी सुनवाई नही हो रही है। ऐसा इनके कहने पर समुदाय मुख्यमंत्री व सरकार की नीयत पर शक करने लगता है। जिसका परिणाम सरकार व समुदाय के मध्य अविश्वास का पनपना आता है।

कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस के लिये उपचुनाव जीतने की राह आसान नही है। उसे बडे सम्भल कर अपनी चुनावी व्यूह रचना रचनी होगी। वही मुस्लिम समुदाय मे सांसद असदुद्दीन आवेसी फेक्टर को रोकने के लिये कुछ ना कुछ करना होगा। किसान आंदोलन वेसे तो राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ जा रहा है लेकिन राजस्थान का किसान वर्ग गहलोत सरकार की नीतियों व घोषणाओं को पुरा नही करने से खुश नही है।

इसके साथ साथ यह भी है कि कांग्रेस के पास चालाक व समझदार एक भी मुस्लिम नेता वर्तमान समय मे ऐसा नही है जो निजी स्वार्थ को छोड़कर समुदाय व सरकार के मध्य कड़ी बनकर अविश्वास को दूर कर सके। या करने की इमानदारी के साथ कोशिश करे।

अशफ़ाक कायमखानी