जनमानस विशेष

राजस्थान का विशनोई समुदाय बच्चों से ज़्यादा चाहते हैं काले हिरण को जानिये कुछ दिलचस्प!

By khan iqbal

April 05, 2018

 

हिरण से इस समाज को खास लगाव रहा है। बिश्‍नोई समाज हिरणों को अपने बच्चों से भी ज्यादा मानता है। इतना ही नहीं समुदाय की महिलाएं हिरणों को अपना दूध भी पिलाती हैं। बिश्‍नोई समुदाय के पुरुषों को कोई लावारिस हिरण का बच्चा दिखता हैं तो उसे वह घर ले आते हैं और अपने बच्चों की तरह रखते हैं। उनके लिए इस समाज की महिलाएं एक मां का पूरा फर्ज निभाती हैं। कहा जाता है कि ये ऐसा वे पिछले 500 साल से करते आ रहे हैं।

शारीरिक बनावट

नर ‘ब्लैक बक’ का वज़न 34-45 किलो और ऊंचाई 74-88 सेमी होती है। वहीं मादा ‘ब्लैक बक’ में लगभग 31 किलो वज़न होता है और ऊंचाई नर के मुक़ाबले कम होती है। नर और मादा ‘ब्लैक बक’ की पहचान उनके सींगों से की जा सकती है। नर ‘ब्लैक बक’ के सींग मादा ‘ब्लैक बक’ की तुलना में लंबे होते हैं।

रंग भी बदलता है ‘ब्लैक बक’

‘ब्लैक बक’ की सबसे बड़ी खासियत होती है इनका रंग बदलने का हुनर। नर ‘ब्लैक बक’ अपना रंग बदलने में माहिर होते हैं। मानसून के महीने तक नर ‘ब्लैक बक’ काला दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही सर्दियों का मौसम आता है इनका रंग हल्का पड़ने लगता है। अप्रैल महीना आते-आते फिर इनका रंग भूरा पड़ने लगता है।

इन जगहों पर मिलता है

‘ब्लैक बक’ यानि इंडियन एंटीलोप आमतौर पर रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है। भारत में ये राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब आदि राज्यों में पाया जाता है। भारत के अलावा पाकिस्तान और नेपाल में भी इसे देखा जा सकता है।

खतरे में है आबादी ‘ब्लैक बक’ घने जंगलों में पाये जाने वाला जन्तु नहीं है। ये मुख्य रूप से घास के मैदानी इलाकों में पाया जाता है। इंसानी आबादी बढ़ने के साथ-साथ इसका शिकार भी बढ़ा है। जिससे ‘ब्लैक बक’ की आबादी पर खतरा मंडराने लगा है। इसीलिए सरकार ने इसके शिकार पर पाबंदी लगा दी है।

राजस्थान में मिलता है ‘विशेष संरक्षण’ राजस्थान का बिश्नोई समुदाय ‘ब्लैक बक’ के संरक्षण में विशेष रूप से जागरूक है।

यहाँ देख सकते हैं ‘ब्लैक बक’ राजस्थान के चुरू ज़िले का ताल-छापर अभयारण्य ‘ब्लैक बक’ के लिए प्रसिद्ध है। हर साल देश-विदेश के पर्यटक यहाँ आते हैं और ‘ब्लैक बक’ के कुलांचे भरते झुंडों को अपने कैमरों में कैद करके ले जाते हैं। तो इन गर्मियों की छुट्टियों में आप भी ताल-छापर अभयारण्य आकर इस खूबसूरत हिरण को अपनी आँखों के सामने देखने का लुत्फ़ उठा सकते हैं।

साभार-बंजारा