राजस्थान

किसको सुनाएं कौन सुनेगा:एक महिला पैरा टीचर का दर्द

By khan iqbal

February 08, 2018

महिला पैराटीचर की दुखभरी दास्ताँ उन्हीं की ज़ुबानी —– — —————————————— मदरसा जदीद मुस्लिम स्कूल निवाई में पैरा टीचर के पद पर कार्यरत परवीन बानो ने जनमानस राजस्थान के माध्यम से सभी महिला पैरा टीचर्स का दर्द बयां कर दिया। उनका कहना है कि आज राजस्थान मदरसा बोर्ड की मुखिया मेहरुन्निसा टांक और इस प्रदेश की मुखिया वसुंधरा राजे दोनों ही महिला है फिर भी एक महिला का दर्द क्यों नहीं समझ पा रही है। आज महंगाई के इस दौर में एक महिला 5000 रुपये की मासिक पगार पर कैसे घर खर्च चला सकती है, उनका मुख्यमंत्री से सवाल है कि क्या कोई मात्र 5000 रुपये की मासिक तनख्वाह में अपने परिवार को दो टाइम का खाना खिला सकता है? क्या इतनी कम तनख्वाह में कोई अपने बच्चों को पढ़ा सकता है? परवीन का कहना था कि जब वसुंधरा राजे की प्रदेश में सरकार बनी थी तब उन्होंने शिक्षा मित्र और मदरसा पैरा टीचर को नियमित करने का वादा किया था,अब सरकार का कार्यकाल पूरा होने में कुछ ही महीने बाकी है ऐसे में उम्मीद का ये दिया बुझता हुआ ही दिखाई दे रहा है। सरकार एक तरफ तो महिला सशक्तिकरण की बात करती है फिर उसे महिला मदरसा पैरा टीचर्स की ये परेशानी क्यों नज़र नही आती। राजस्थान सरकार की तरफ से मदरसे में पड़ने वाले बच्चों पर भी कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। प्रदेश में कई मदरसों के पास तो बिल्डिंग भी नहीं है। जब सरकार सबको शिक्षित करने की बात करती है तो सरकार को शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सभी सुविधाएं भी मुहैया करवानी चाहिए। इन्ही मदरसों में पड़ने वाले बच्चे डॉ. ज़ाकिर हुसैन, फखरुद्दीन अली,अब्दुल कलाम देश में राष्ट्रपति के पद तक भी पहुंचे है फिर भी सरकार पता नहीं क्यों मदरसा पैरा टीचर्स और मदरसे के बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। राजस्थान में पैरा टीचर्स की हालत दिनों दिन बद से बदतर होती जा रही है। काश उनका दर्द प्रदेश के राजनेता समझ पाते कि एक पैरा टीचर कैसे 4000-5000 रुपये में पूरा महीना गुजारा करता होगा। आज हालात ये है कि पैरा टीचर्स की तनख्वाह पिछले चार महीने से बकाया है। पैरा टीचर्स कर्ज़ में डूबे हुए हैं, अपनी घर गृहस्थी चलाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। पैरा टीचर्स की तनख्वाह किसी मजदूर की न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। आज सरकार ना तो पैरा टीचर्स के बारे में सोच रही है और ना ही मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के बारे में। जिन बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है उन्ही बच्चों के भविष्य को संवारने वाले शिक्षकों को एक मजदूर से भी कम वेतन दिया जा रहा है और वो भी समय पर नहीं मिल रहा है। राजस्थान मदरसा बोर्ड द्वारा 3500 विद्यालय संचालित किये जा रहे है जिनमें लगभग 6400 पैराटीचर संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत है। इन पैराटीचर को न्यूनतम 4100 से 7500 रूपये का मासिक मानदेय दिया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में मदरसा पैराटीचर का गुजारा करना बहुत मुश्किल है। जब #जनमानस_राजस्थान ने राजस्थान मदरसा बोर्ड की चैयरपर्सन मेहरुन्निसा टांक से इस मामले पर सरकार का रुख़ जानने की कोशिश की तो उन्होंने फोन ही नही उठाया, हमने व्हाट्सएप मैसेज के जरिये भी उन तक पैरा टीचर्स की समस्या पहुँचाने का प्रयास किया जिसका भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। पैरा टीचर्स को उनका हक़ दिलवाने के लिए आप भी जनमानस राजस्थान की इस मुहीम से जुड़िये, आप भी हमे अपने वीडियो संदेश भेज सकते है। हम आपके संदेश को सरकार तक पहुँचाने का पूरा प्रयास करेंगे।